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धारा 370, किसकी गलती, किसने सुधारी।।।

भारतीय संविधान का अनुच्छेद 370 एक ऐसा लेख था जो जम्मू और कश्मीर को स्वायत्तता का दर्जा देता था। संविधान के भाग XXI में लेख का मसौदा तैयार किया गया है: अस्थायी, संक्रमणकालीन और विशेष प्रावधान। जम्मू और कश्मीर की संविधान सभा को, इसकी स्थापना के बाद, भारतीय संविधान के उन लेखों की सिफारिश करने का अधिकार दिया गया था जिन्हें राज्य में लागू किया जाना चाहिए या अनुच्छेद 370 को पूरी तरह से निरस्त करना चाहिए। बाद में जम्मू-कश्मीर संविधान सभा ने राज्य के संविधान का निर्माण किया और अनुच्छेद 370 को निरस्त करने की सिफारिश किए बिना खुद को भंग कर दिया, इस लेख को भारतीय संविधान की एक स्थायी विशेषता माना गया। [२] [३]

मोदी सरकार ने 5 अगस्त 2019 को राज्यसभा में एक ऐतिहासिक संकल्प पेश किया जिसमें जम्मू कश्मीर राज्य से संविधान का अनुच्छेद 370 हटाने और राज्य का विभाजन जम्मू कश्मीर एवं लद्दाख के दो केंद्र शासित क्षेत्रों के रूप में करने का प्रस्ताव किया गया । जम्मू कश्मीर केंद्र शासित क्षेत्र में अपनी विधायिका होगी जबकि लद्दाख बिना विधायी वाली केंद्रशासित क्षेत्र होगा

विशेष अधिकार

  • धारा 370 के प्रावधानों के अनुसार, संसद को जम्मू-कश्मीर के बारे में रक्षा, विदेश मामले और संचार के विषय में कानून बनाने का अधिकार है लेकिन किसी अन्य विषय से सम्बन्धित क़ानून को लागू करवाने के लिये केन्द्र को राज्य सरकार का अनुमोदन चाहिये।
  • इसी विशेष दर्ज़े के कारण जम्मू-कश्मीर राज्य पर संविधान की धारा 356 लागू नहीं होती।
  • इस कारण राष्ट्रपति के पास राज्य के संविधान को बर्ख़ास्त करने का अधिकार नहीं है।
  • 1976 का शहरी भूमि क़ानून जम्मू-कश्मीर पर लागू नहीं होता।
  • इसके तहत भारतीय नागरिक को विशेष अधिकार प्राप्त राज्यों के अलावा भारत में कहीं भी भूमि ख़रीदने का अधिकार है। यानी भारत के दूसरे राज्यों के लोग जम्मू-कश्मीर में ज़मीन नहीं ख़रीद सकते।
  • भारतीय संविधान की धारा 360 जिसके अन्तर्गत देश में वित्तीय आपातकाल लगाने का प्रावधान है, वह भी जम्मू-कश्मीर पर लागू नहीं होती।
  • जम्मू और कश्मीर का भारत में विलय करना ज़्यादा बड़ी ज़रूरत थी और इस काम को अंजाम देने के लिये धारा 370 के तहत कुछ विशेष अधिकार कश्मीर की जनता को उस समय दिये गये थे। ये विशेष अधिकार निचले अनुभाग में दिये जा रहे हैं।

भारतीय जनसंघ के संस्थापक श्यामा प्रसाद मुखर्जी ने शुरू से ही अनुच्छेद 370 का विरोध किया। उन्होने इसके खिलाफ लड़ाई लड़ने का बीड़ा उठाया था। उन्होंने कहा था कि इससे भारत छोटे-छोटे टुकड़ों में बंट रहा है। मुखर्जी ने इस कानून के खिलाफ भूख हड़ताल की थी। वो जब इसके खिलाफ आन्दोलन करने के लिए जम्मू-कश्मीर गए तो उन्हें वहां घुसने नहीं दिया गया। वह गिरफ्तार कर लिए गए थे। 23 जून 1953 को हिरासत के दौरान ही उनकी रहस्यमत ढंग से मृत्यु हो गई।

प्रकाशवीर शास्त्री ने अनुच्छेद 370 को हटाने का एक प्रस्ताव 11 सितम्बर, 1964 को संसद में पेश किया था। इस विधेयक पर भारत के गृहमंत्री गुलजारी लाल नंदा ने 4 दिसम्बर, 1964 को जवाब दिया। सरकार की तरफ से आधिकारिक बयान में उन्होंने एकतरफा रुख अपनाया। जब अन्य सदस्यों ने इसका विरोध किया तो नन्दा ने कहा, “यह मेरा सोचना है, अन्यों को इस पर वाद-विवाद नहीं करना चाहिए।” इस तरह का एक अलोकतांत्रिक तरीका अपनाया गया। नंदा पूरी चर्चा में अनुच्छेद 370 के विषय को टालते रहे। वे बस इतना ही कह पाए कि विधेयक में कुछ क़ानूनी कमियां हैं। जबकि इसमें सरकार की कमजोरी साफ़ दिखाई देती हैं। [5][6]

हिन्दू महासभाभारतीय जनसंघभारतीय जनता पार्टी और शिव सेना शुरू से ही इसे हटाने की मांग करते आये हैं। अन्ततः यह धारा अगस्त 2019 में समाप्त कर दी गयी।

स्त्रोत: https://hi.m.wikipedia.org/wiki/%E0%A4%85%E0%A4%A8%E0%A5%81%E0%A4%9A%E0%A5%8D%E0%A4%9B%E0%A5%87%E0%A4%A6_%E0%A5%A9%E0%A5%AD%E0%A5%A6

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My First Blog Post

उठो जागो और तब तक न रुको जब तक लक्ष्य प्राप्त न हो ।

––स्वामी विवेकानन्द

Be yourself; Everyone else is already taken.

— Oscar Wilde.

This is the first post on my new blog. I’m just getting this new blog going, so stay tuned for more. Subscribe below to get notified when I post new updates.

📚 श्री गीता जयंती विशेष 📚

भगवदगीता गीता अध्याय-:

  1. पहला अध्याय- कुरुक्षेत्र के युद्धस्थल में सैन्य निरीक्षण
  2. दूसरा अध्याय- गीता का सार
  3. तीसरा अध्याय- कर्मयोग
  4. चौथा अध्याय- दिव्य ज्ञान
  5. पांचवा अध्याय- कर्मयोग कृष्णाभावनाभावित कर्म
  6. छठा अध्याय- ध्यानयोग
  7. सातवां अध्याय- भगवद्ज्ञान
  8. आठवां अध्याय- भगवत्प्राप्ति
  9. नौवां अध्याय- परम गुह्य ज्ञान
  10. दशवां अध्याय- श्रीभगवान का ऐश्वर्य
  11. ग्यारावां अध्याय- विराट रूप
  12. बारहवाँ अध्याय- भक्तियोग
  13. तेरहवा अध्याय- प्रकृति, पुरुष तथा चेतना
  14. चौदहवा अध्याय- प्रकृति के तीन गुण
  15. पन्द्रहवा अध्याय- परुषोत्तम योग
  16. सोलहवां अध्याय- देवी तथा आसुरी स्वभाव
  17. सत्रहवां अध्याय- श्रद्धा के विभाग
  18. अठारहवां अध्याय- संन्यास की सिद्धि

श्रीमद्भागवत गीता क्यों पढ़े..?

  • इस ग्रंथ को पढ़ने से वह समझने से मनुष्य अपने कर्तव्यों को भलीभांति पहचान सकता है।और साथ-साथ अपने मानवीय व देवीय गुणों का विकास कर सकता है,और वैसे भी हमारे ग्रन्थों में मनुष्य योनि को सबसे सवश्रेष्ठ बताया गया हैं लेक़िन मानव जीवन बहुत कठिनाइयों से गुजरता हैं हमें हर मोड़ पर अनेकों परेशनियों का सामना करना पड़ता हैं जो हमारे जीवन को उथलपुथल कर देती है औऱ इन्ह समस्या का समाधान ढूंढना बेहद कठिन होता हैं। इसलिए हमें श्रीमद्भागवत गीता को पढ़ना चाहिए क्योंकि यह मानव जीवन का सार है जिसमें मनुष्य के हर सवाल का जवाब मिलता हैं और भगवदगीता को समस्त ग्रन्थों में सवश्रेष्ठ माना गया है इसलिए समस्त ग्रन्थों को पढ़ने के बजाय आप केवल श्रीमद्भागवत गीता को पढ़ सकते है/
  • भगवदगीता एक ऐसा श्रेष्ठ ग्रंथ है जिसकों हर क्षेत्र का व्यक्ति पढ़ सकता हैं जैसे वैज्ञानिक, मनस्विद, राजनीतिज्ञ, संन्यासी, दार्शनिक, शिक्षक या विद्यार्थी कोई भी हो सभी को जीवन मे भगवदगीता को ज़रूर पढ़ना चाहिए ताकि हम अपने जीवन को बेहतर तरीके से समझ सके व बेहतर बना सके/
  • माना जाता है कि अगर आपके घर मे भगवद्गीता है तो यह आपके घर मे सुखः, शांति औऱ तरक्की को लेकर आती हैं और यह मनुष्य जीवन की सार्थकता को सिद्ध करने का सबसे बेहतर ग्रंथ है, यह ग्रंथ सभी क्षेत्रों में आप को सर्वश्रेष्ठ सफलता प्रदान करने में सहायक साबित होगा/
  • श्रीमद्भगवद्गीता स्वयं सिद्ध ग्रंथ है क्योंकि यह भगवान के श्री मुख से निकला हुआ एकमात्र ग्रंथ है… इसके प्रत्येक श्लोक संपूर्ण शाश्वत सिद्ध मंत्र है/
  • भगवद गीता किसी जाति, संप्रदाय का ग्रंथ नहीं है यह संपूर्ण मानव जाति का ग्रंथ है… इस ग्रंथ के उपदेश प्रत्येक कालखंड के प्रत्येक मनुष्य के लिए हमेशा सदा नूतन व शाश्वत है। अतः इसलिए यह श्रीमद्भागवत गीता प्रत्येक मनुष्य के घर में होना आवश्यक है और इसका अध्ययन भी प्रत्येक मनुष्य को अवश्य करना चाहिए,,जब मनुष्य श्रीमद् भागवत गीता का नित्य प्रति दिन श्रद्धा पूर्वक इसका अध्ययन करेगा तो फिर यह गीता मनुष्य के जीवन में जरूर उतर के आएगी और मानव जीवन को श्रेष्ठता प्रदान करेगी/
  • 11 दिसंबर 2024, बुधवार को गीता जयंती है। इस दिन भगवान के श्रीमुख से श्रीमद्भागवत गीता के उपदेश निकले थे। अतः आप सभी से निवेदन है की श्रीमद् भागवद गीता का प्रचार प्रसार ज्यादा से ज्यादा करें,अपने मित्र व परिजनों को श्रीमद्भगवत गीता की पुस्तक ज्यादा से ज्यादा भेंट करें//

यदा यदा हि धर्मस्य ग्लानिर्भवति भारत।
अभ्युत्थानमधर्मस्य तदात्मानं सृजाम्यहम्।।
परित्राणाय साधूनां विनाशाय च दुष्कृताम्।
धर्मसंस्थापनार्थाय सम्भवामि युगे युगे।। *जयश्री राधेकृष्णाl

सत्संग क्या है ?


आपने कई लोगों के मुख से यह सुना होगा कि क्या ईश्वर है ? है , तो कहां है ? उसका रूप-रंग कैसा है ? हम सब यह भी जानते हैं कि ऐसे प्रश्न करनेवालों को इसका उत्तर देना बहुत सरल नहीं है। लेकिन हमारे ऋषियों , गुरुओं एवं संतों ने डंके की चोट पर घोषणा की है कि ईश्वर है।

इसे एक दृष्टांत (उदाहरण) से समझें।
गौतम बुद्ध के जीवन की एक घटना है। एक बार गौतम बुद्ध अपने प्रवास पर थे। वे एक गांव से होकर गुजर रहे थे। जिस गांव से वे गुजर रहे थे , उस गांव में एक बहुत बड़ा नेत्रहीन तार्किक था। नेत्रहीन होने के कारण उस तार्किक को दिखता नहीं था।
बाकी लोगों को सभी कुछ प्रकाश में दिखता था। जब यह बात नेत्रहीन तार्किक को बताई जाती थी तो वह कहता था कि प्रकाश का कोई अस्तित्व नहीं है। तुम लोग गलत कहते हो। प्रकाश बोलकर कोई वस्तु है ही नहीं , यदि है तो मुझे उसका स्पर्श कराओ ताकि मैं प्रकाश को छू सकूं और जान सकूं कि प्रकाश है। गांववाले प्रकाश का स्पर्श अंधे को नहीं करा पाए , अतः उसने कहा कि प्रकाश नहीं है।

हम सभी जानते हैं कि जो दिव्यांग होते हैं , उनकी बुद्धि विलक्षण होती है। उस अंधे तार्किक ने कहा – ठीक है। तुम उसका स्पर्श नहीं करा सकते , तो यह बताओ कि उसका वजन कितना है ? गांव वाले प्रकाश का वजन उसे नहीं बता पाए। हमलोग भी प्रकाश का वजन बता पाने में असमर्थ हैं। उस तार्किक ने कहा कि यदि वह कोई वस्तु है , तो उसका कुछ-न-कुछ तो वजन होगा ही। जब वजन (भार) नहीं है , तो इसका अर्थ यह हुआ कि वह वस्तु है ही नहीं अर्थात् प्रकाश नहीं है।

तब तार्किक ने कहा कि अच्छा उसका कोई गंध है। मुझे उसके निकट ले चलो ताकि मैं सूंघकर पता कर सकूं कि वह प्रकाश है। हम सभी जानते हैं कि प्रकाश गन्धहीन होता है। लोग प्रकाश का गंध उसको नहीं सूंघवा पाए। अब वह तार्किक अपने निर्णय पर अडिग हो गया और कहा कि प्रकाश नहीं है। तुम लोग असत्य बोलते हो।
इतना सुनने के बाद भी गांववालों ने कहा कि प्रकाश है। तब उसे तार्किक ने कहा कि प्रकाश की कोई ध्वनि होगी। तुमलोग मुझे उसकी आवाज सुनाओ। गांव वाले यह भी न कर सके। अंत में तार्किक ने कहा – ठीक है , प्रकाश का कोई स्वाद तो होगा , मुझे उसके स्वाद को चखने दो। फिर मैं प्रकाश को समझ जाऊंगा। गांव वाले प्रकाश का स्वाद भी उसे चखा नहीं सके।
इस प्रकार गांव वाले उसके प्रश्नों से निरुत्तर हो गए थे एवं निराश हो गए थे।

ऐसे समय में जब गांववालों को यह जानकारी मिली कि गौतम बुद्ध गांव के बगल से गुजर रहे हैं , तो वे लोग गौतम बुद्ध के पास पहुंचे और नेत्रहीन तार्किक के पूरी घटना की जानकारी दी। गौतम बुद्ध ने बड़े धीरज एवं शांति के साथ सुना और कहा कि उस नेत्रहीन तार्किक को बुलाया जाए। नेत्रहीन तार्किक वहां पर आया और आते ही उसने गौतम बुद्ध से ही प्रश्न किया कि क्या प्रकाश है ? आप इसको प्रमाणित कर सकते हैं !
गौतम बुद्ध के साथ उनके वैद्य जीवक साथ चल रहे थे। गौतम बुद्ध ने जीवक को कहा कि इसको अपने यहां ले जाओ और इसके नेत्र की शल्य-चिकित्सा करो। आंख ठीक हो जाने पर उसे स्वयं प्रकाश में सब-कुछ दिखने लगेगा। तब उसे किसी प्रमाण की आवश्यकता नहीं होगी।

नेत्र की शल्य-चिकित्सा हो जाने के बाद वह तार्किक बड़ा अचंभित हुआ। उसे प्रकाश में सब कुछ दिखने लग गया , उसे अपने तर्क पर शर्मिंदगी महसूस हुई।
अंधे को प्रकाश समझाने के लिए उसके आंख की शल्य-चिकित्सा जरूरी है। फिर वह स्वयं प्रकाश जान पाता है कि प्रकाश सर्वत्र है।
जिस प्रकार चर्म-चक्षु को खोल देने की प्रक्रिया का नाम शल्य-चिकित्सा है , उसी प्रकार मनुष्य के ज्ञान-चक्षु को खोल देने की प्रक्रिया का नाम सत्संग है। सत्संग में भाग लेने पर मनुष्य की सुप्त चेतना जागृत हो उठती है और उसे प्रकाश की भांति सर्वत्र ईश्वरत्व की अनुभूति होती है।

Mokshda ekadashi

|| मोक्षदा एकादशी व्रत ||
11 दिसंबर 2024 बुधवार

मोक्षदा एकादशी व्रत मार्गशीर्ष माह की शुक्ल पक्ष एकादशी को रखा जाता है। अतः यह व्रत 11 दिसंबर 2024, बुधवार को रखा जाएगा/

व्रत का पारण समय-:
12 दिसंबर, सुबह 7:00 से सुबह 10:00 तक रहेगा/

एकादशी के दिन ना करें ये काम-:

  • एकादशी के दिन वृक्ष से पत्ते नहीं तोड़ेने चाहिए। और मन- वचन- कर्म से किसी भी तरह की जीव हिंसा नहीं करनी चाहिए।
  • इस दिन घर में बहुत ध्यान से झाड़ू- पोंचा लगाना चाहिए, घर में झाड़ू लगाने समय ध्यान रखना चाहिए कि चीटियों या छोटे-छोटे जीवों को कोई नुकसान ना पहुंचे।
  • एकादशी व्रत के दिन बहुत सोच-समझकर बोलना चाहिए, किसी को अपशब्द नहीं बोलने चाहिए। हल्की उर्जा वाले शब्दों को बोलने से बचना चाहिए।
  • इस दिन चावल का सेवन भी वर्जित होता है। भूलकर भी चावल से बनी चीजें नहीं खानी चाहिए। जो लोग एकादशी का व्रत नहीं करते उन्हें भी चावल का सेवन नहीं करना चाहिए।
  • एकादशी के दिन किसी का दिया हुआ अन्न नहीं खाना चाहिए, किसी दूसरे के घर भोजन भी नहीं करना चाहिए।
  • चाहे आप व्रत करें या ना करें लेकिन एकादशी के व्रत के दिन तामसिक भोजन जैसे- लहसुन, प्याज, मसूर की दाल इत्यादि का सेवन नहीं करना चाहिए।
  • यदि आप एकादशी की व्रत फलहारी करते हैं तो इस दिन लहसुन ,प्याज, गोभी, पालक, शलजम आदि का सेवन नहीं करें।
  • एकादशी व्रत के दिन दिनचर्या पवित्र व सात्विक होनी चाहिए।व्रत के दिन किसी अन्य में दोष दर्शन भी नहीं करना चाहिए।।

एकादशी व्रत पर क्या करना चाहिए-:

  • एकादशी व्रत के दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान के बाद सूर्य भगवान को जल अर्पित करना चाहिए।
  • भगवान श्री हरि के सामने शुद्ध देसी घी का दीपक जलाकर उनकी पूजा उपासना करें, भगवान को फल-‌ फ्रूट का तुलसी दल डालकर भोग लगाएं।
  • भगवान श्रीहरि की पूजा उपासना करना, श्रीहरि के मंत्रों का व नाम जप, श्री विष्णु सहस्त्रनाम का पाठ, श्री गीता जी व श्री रामचरित्र मानस के पाठ करना और भगवान श्रीहरि की कथा श्रवण करना श्रेष्ठ कल्याणकारी होता है।
  • एकादशी व्रत के दिन गीता का भक्ति योग अध्याय पढ़ना चाहिए या फिर सुनना चाहिए।
  • एकादशी व्रत के दिन कम बोलना चाहिए व ज्यादा से ज्यादा मौन का पालन करना चाहिए।
  • जो व्यक्ति फलाहरी एकादशी करते हैं उन्हें केला, पपीता, अनार, अमरुद , संतरा, अंगूर व मौसम के अनुसार फलों का सेवन करना चाहिए//

(नोट-: जो लोग एकादशी व्रत पहली बार शुरू करना चाह रहे हैं वो इस मार्गशीर्ष शुक्ल पक्ष मोक्षदा एकादशी से व्रत शुरू कर सकते हैं)


Bhagwat chintan

आदरणीय पाठकों
🕉 राधे – राधे ॥🙏 आज का भगवद् चिन्तन॥
09 – 12 – 2024
|| सेवा का संकल्प लें ||

अच्छे विचारों का आचरण में उतरना भी अति आवश्यक है क्योंकि श्रेष्ठ आचरण ही व्यक्ति को महान बनाता है। विचारात्मक प्रवृत्ति रचनात्मक अवश्य होनी चाहिए। शुभ एवं श्रेष्ठ कार्य केवल विचारों तक ही सिमट कर नहीं रह जाने चाहिए अपितु कार्य रूप में भी परिणित होने चाहिए। जिस दिन शुभ विचार सृजन का रूप ले लेता है उस दिन परमात्मा का आशीर्वाद भी स्वतः प्राप्त हो जाता है।

जीवन में कुछ ऐसे भी संकल्प लें कि जीवन सदाचारी बनकर समाज की उन्नति में सहयोगी बन सके। समाज ने हमें बहुत कुछ दिया अब हमारा संकल्प भी समाज को कुछ देने का होना चाहिए। केवल लेने के लिए नहीं अपितु समाज को देने के लिए जीने की भावना भी साधना है। इस बात का भी सदैव स्मरण रखना चाहिए कि जीवन अस्थायी है इसलिए सर्व हित में जीवन के प्रत्येक क्षण का सदुपयोग किया जाये।

💐🌹श्री राधा 🌹💐

 सुनार की तकदीर

एक बार एक राजा अपनी प्रजा का हाल-चाल पूछने के लिए गाँवों में घूम रहा था।

घूमते-घूमते उसके कुर्ते के सोने के बटन की झालर टूट गई, उसने अपने मंत्री से पूछा, कि इस गांव में कोई सुनार है, जो मेरे कुर्ते में नया बटन बना सके?

उस गांव में सिर्फ एक ही सुनार था, जो हर तरह के गहने बनाता था, उसको राजा के सामने ले जाया गया।

राजा ने कहा, कि तुम मेरे कुर्ते का बटन बना सकते हो ?

सुनार ने कहा, हुज़ूर यह कोई मुश्किल काम थोड़े ही है ! उसने, कुर्ते का दूसरा बटन देखकर, नया बटन बना दिया। और राजा के कुर्ते में फिट कर दिया।

राजा ने खुश होकर सुनार से पूछा, कि कितने पैसे दूं ?

सुनार ने कहा :- “महाराज रहने दो, छोटा सा काम था।”

सुनार ने, मन में सोचा, कि सोना तो राजा का ही था, उसने तो सिर्फ मजदूरी की है। और राजा से क्या मजदूरी लेनी है…!

राजा ने फिर से सुनार को कहा कि, नहीं-नहीं, बोलो कितने दूं ?

सुनार ने सोचा, की दो रूपये मांग लेता हूँ। फिर मन में विचार आया, कि कहीं राजा यह न सोच ले कि एक बटन बनाने का मेरे से दो रुपये ले रहा है, तो गाँव वालों से कितना लेता होगा, और कोई सजा न दे दे। क्योंकि उस जमाने में दो रुपये की कीमत बहुत होती थी।

सुनार ने सोच-विचार कर, राजा से कहा कि :- “महाराज जो भी आपकी इच्छा हो, दे दो।”

अब राजा तो राजा था। उसको अपने हिसाब से देना था। कहीं देने में उसकी इज्जत ख़राब न हो जाये और, उसने अपने मंत्री को कहा, कि इस सुनार को दो गांव दे दो, यह हमारा हुक्म है।

यहाँ सोनी जी, सिर्फ दो रुपये की, मांग का सोच रहे थे, मगर, राजा ने उसको दो गांव दे दिए।

शिक्षा :-

हमे भी सुनार की तरह, ईश्वर से कुछ मांगना है तो उसी पर छोड़ देना चाहिये क्यूकि जब हम प्रभु पर सब कुछ छोड़ते हैं, तो वह अपने हिसाब से देता है और मांगते हैं तो सिर्फ हम मांगने में कमी कर जाते हैं। देने वाला तो पता नहीं क्या देना चाहता है, लेकिन, हम अपनी हैसियत से बड़ी तुच्छ वस्तु मांग लेते हैं.।

इसीलिए तो कहते है कि ईश्वर पर छोड़ दो, उनसे कभी कुछ मत मांगों, वो अपने आप दे देंगे, बस उसी से संतुष्ट रहो। ईश्वर कभी कम नहीं देता ।

जवानी में हमें क्या नहीं करना चाहिए ताकि वृद्धावस्था में गंभीर समस्या न हो? के लिए गिरीश चंद्र तिवारी (Tewari Girish Chandra) का जवाब https://hi.quora.com/%E0%A4%9C%E0%A4%B5%E0%A4%BE%E0%A4%A8%E0%A5%80-%E0%A4%AE%E0%A5%87%E0%A4%82-%E0%A4%B9%E0%A4%AE%E0%A5%87%E0%A4%82-%E0%A4%95%E0%A5%8D%E0%A4%AF%E0%A4%BE-%E0%A4%A8%E0%A4%B9%E0%A5%80%E0%A4%82/answers/251058592?ch=99&share=4b151c23&srid=ZpWff

आत्मविश्वास को बढ़ाने के लिए आजमाए प्रतिदिन ये तरीके…

#अपने आप को याद दिलाएं कि आपको किसी कारण की आवश्यकता नहीं है – आप केवल ऐसा होने का चयन कर के आत्मविश्वास जगा सकते है । हर दिन, बस एक सक्रिय विकल्प बनाएं और तय करें कि आज आप आत्मविश्वास से भरे रहेंगे।

# हर चीज पर ओवरकमिट और ओवरडेलिवर – जब आप किसी लक्ष्य, योजना या कार्य के लिए प्रतिबद्ध होते हैं, चाहे वह खुद के लिए हो या दूसरों के लिए हो, तो सुनिश्चित करें कि आप जितना सोचते हैं उससे अधिक कर सकते हैं और फिर जितना आपने कहा है उससे अधिक करेंगे। हर दिन कम से कम एक चीज के साथ खुद को अपनी सीमाएं लांघें।

# अपने आप को उच्चतम स्तर तक पकड़ो – आपकोअपने लिए काम करने की आवश्यकता है, किसी और के लिए नहीं। आप इसे अपना सर्वश्रेष्ठ देने के लिए खुद पर एहसान करते हैं।

#जितनी बार आप कर सकते हैं अपने आप को पुरस्कृत करें – अपने अतीत को देखें और महसूस करें कि आप पहले से ही अविश्वसनीय चीजें कर चुके हैं। फिर दिन को देखें और महसूस करें कि आपने आज भी आश्चर्यजनक चीजें की हैं। अच्छी तरह से किए गए काम के लिए खुद को पुरस्कृत करें, चाहे कितना भी छोटा क्यों न हो।

“बोल्ड बनो और ताकतवर सेना तुम्हारी सहायता के लिए आएगी।” – बेसिल किंग

#वैसे भी करो – मुझे पता है तुम कुछ चीजों से डरते हो। मुझे पता है कि कुछ चीजें आपको असहज बनाती हैं। मुझे पता है कि जीवन हमेशा आसान नहीं होता है। तुम वैसे भी क्या करने की जरूरत है! डर से सीमित न रहें और इसके बजाय इसे पार करें।

# अपने आप को विजेताओं के साथ रखे – अपने आप को विजेताओं के साथ घेरें जो आपको अपना सर्वश्रेष्ठ बनाने के लिए धक्का देना चाहते हैं। “फील-गुड” लोगों के आसपास रहना बंद करें और ऐसे लोगों का एक समूह बनाएं जो एक-दूसरे को चुनौती देने की इच्छा रखते हैं!

इसके बारे में मत सोचो या बात मत करो; DO IT – आत्मविश्वास 9 भागों की क्रियाओं और केवल 1 भाग सोच और बात करने से आता है।

इतना समय बर्बाद करना बंद करो और कार्य करो।

थकान तनाव एवम निराशा को कैसे दूर करे….

अधिकांश लोग ऊर्जा प्रबंधन के सिद्धांत को नहीं जानते हैं।

आपने समय प्रबंधन को सुना और अभ्यास किया होगा, लेकिन सबसे कम संसाधन में से एक आपकी ऊर्जा है।

समय की तरह, ऊर्जा एक परिमित संसाधन है और आपके पास प्रतिदिन केवल एक परिमित राशि होती है।

इसलिए इसे बुद्धिमानी से खर्च करना महत्वपूर्ण है क्योंकि पैसे की तरह, यदि आप ऊर्जा का बुरा निवेश करते हैं तो आपको खराब रिटर्न मिलेगा।

ऊर्जा प्रबंधन के तीन पहलू हैं।

1. ऊर्जा का संरक्षण।

2. ऊर्जा को बढ़ाना।

3. कुछ सार्थक कार्यो में अतिरिक्त ऊर्जा का निर्देशन।

1.ऊर्जा संरक्षण:

हो सकता है कि आपको इसका एहसास न हो लेकिन आप सोशल मीडिया ब्राउज़ करने या YouTube वीडियो देखने जैसी कुछ चीजें करके बहुत सारी मूल्यवान ऊर्जा बहा रहे हैं।

यहाँ कुछ तरीके दिए गए हैं जिनसे आप अपनी ऊर्जा का संरक्षण कर सकते हैं।

सोशल मीडिया को ब्राउज़ करना बंद कर दें, यदि आप अपने लक्ष्यों पर काम करने जैसी सार्थक गतिविधियों में अपनी ऊर्जा का अच्छा निवेश करने के बाद सोशल मीडिया का उपयोग करना चाहते हैं।

लोगों के साथ बहस करने से बचें, इस से आपकी ऊर्जा बड़ी भारी मात्रा में बह जाती है। जब आप इंटरनेट पर और वास्तविक जीवन में लोगों के साथ बहस करते हैं।

हर कीमत पर नकारात्मक लोगों से बचें, जो लोग आपसे मिलने के दौरान हर समय नकारात्मक चीजों के बारे में बात करते हैं। आपका मन एक बगीचा है, इसे लोगों को इसे डंपिंग यार्ड में बदलने न दें।

यदि कोई ऐसी चीज़ है जो आपको वर्तमान समय में परेशान करती है, तो उसे एक कागज़ पर लिखें और अपने आप से कहें कि आप बाद में उससे निपट लेंगे। जब आप किसी चीज के बारे में लगातार चिंतित रहते हैं जब आप काम कर रहे होते हैं या इसका अध्ययन करते हैं तो यह आपकी बहुत सारी ऊर्जा को बहा देगा।

उन चीज़ों के बारे में सोचना बंद करें जिन्हें आप बदल नहीं सकते हैं, सब कुछ आपका नियंत्रण नहीं हो सकता है इसलिए आपकी ऊर्जा सोच को ख़त्म करने का कोई मतलब नहीं है।

एक समय में एक कार्य पर काम करना, मल्टीटास्किंग और संदर्भ स्विचिंग फिर से विशाल ऊर्जा ड्रेनर्स हैं। जब हम एक कार्य को दूसरे से करने पर स्विच करते हैं, तो हम बहुत समय बर्बाद करते हैं।

प्रो टिप: पैसे की तरह अपनी ऊर्जा का इलाज करें और इसे बुद्धिमानी से खर्च करें। क्या आप एक मूर्ख सामाजिक नेटवर्किंग साइट को ब्राउज़ करने के लिए पैसे का भुगतान करेंगे जो आपको कोई मूल्य नहीं देता है? यदि नहीं तो आप अपनी ऊर्जा क्यों बर्बाद करेंगे जो कि मूल्यवान है?

2. अपनी ऊर्जा को बढ़ाना:

कुछ चीजें हैं जो आप अपनी महत्वपूर्ण ऊर्जा को बढ़ाने के लिए कर सकते हैं, ये चीजें सरल हैं और लगभग किसी द्वारा भी की जा सकती हैं।

अपनी शारीरिक फिटनेस में सुधार करें, यह बहुत बड़ा प्रभाव डालता है कि आप कैसा महसूस करते हैं। आपको फिट रहने के लिए बॉडी बिल्डर बनना होगा या जिम जाना होगा। आप दिन में केवल ३०-४० मिनट चल सकते हैं और कुछ पुशअप कर सकते हैं।

एक अच्छा आहार लें, आपका शरीर एक वाहन है और आपका भोजन आपका ईंधन है। क्या आप अपने मर्सिडीज में गंदे ईंधन डालेंगे? अगर नहीं तो आप अपने शरीर में कबाड़ क्यों डालेंगे? जंक फूड खाना बंद करें और स्वस्थ खाएं। स्वस्थ भोजन का मतलब यह नहीं है कि आपको उन महंगे प्रोटीन टब खरीदने हैं। बहुत सारे खाद्य पदार्थ हैं जो पौष्टिक और अभी तक सस्ते हैं जैसे मूंगफली, केले, अंडे आदि। यदि आप अपने शरीर को अच्छी तरह से ईंधन देते हैं, तो यह अधिक ऊर्जा का उत्पादन करेगा।

मल्टी विटामिन और मिनरल सप्लीमेंट्स लें, वे आपके मस्तिष्क के स्वास्थ्य के लिए महत्वपूर्ण हैं और आपके प्रदर्शन को बहुत बढ़ा सकते हैं। आप कभी नहीं जानते हैं कि आपके शरीर में कौन से महत्वपूर्ण विटामिन या खनिज हैं इसलिए यह एक वर्ष में एक बार रक्त परीक्षण करने और डॉक्टर से मिलने के लिए बेहतर है। उन महंगे मल्टीविटामिन्स के लिए मत जाइए जिनकी कीमत बहुत कम है। आपके स्थानीय मेडिकल स्टोर पर जेनेरिक मल्टीविटामिन पर्याप्त हैं और वे सस्ती हैं।

पावर नैप लेना आपके दिमाग और शरीर को रिचार्ज करने का एक और शानदार तरीका है। यदि आप दिन के दौरान थका हुआ और थका हुआ महसूस करते हैं, तो अपने फोन का उपयोग करने के बजाय 20 मिनट की झपकी लें। आप काम में ताजगी और स्फूर्ति महसूस करेंगे।

3. कुछ सार्थक कार्यो में अतिरिक्त ऊर्जा का निर्देशन:

दिन के अंत तक हमारे पास कुछ अतिरिक्त ऊर्जा होती है।

आप इसे अपनी इच्छानुसार खर्च कर सकते हैं, लेकिन यह सुनिश्चित कर लें कि आप इसे किसी ऐसी चीज़ में निवेश न करें, जो प्रति-उत्पादक हो, जैसे टीवी देखना या डोपामाइन उत्प्रेरण वीडियो देखने में समय बिताना।

बिल गेट्स के पास यह ट्रम्पोलिन रूम उनके घर में बनाया गया है ताकि उनके बच्चे पूरे दिन अपनी अतिरिक्त ऊर्जा कूदने में खर्च कर सकें।

इस अतिरिक्त ऊर्जा को खर्च करने के लिए महत्वपूर्ण कारण इसके दुरुपयोग से बचने के लिए है।

जब आपके पास ऊर्जा का निर्माण होता है और उसका कहीं जाना नहीं होता है, तो संभावना है कि हम इसका दुरुपयोग करेंगे।

अन्य चीजें जो आप इस ऊर्जा को खर्च करने के लिए कर सकते हैं:

* एक किताब पढ़ना जो आपको बेहतर नींद में मदद करेगा।

* घर पर या जिम में वर्कआउट करना।

* स्विमिंग कर सकते है

*यदि आप कला में हैं, तो आप एक लेख या एक कविता लिख ​​सकते हैं।

एक बार जब आप उपरोक्त तीन चीजों में बेहतर हो जाते हैं तो आपके पास अंततः अपने लक्ष्यों पर काम करने की ऊर्जा होगी और थकान और आलस महसूस नहीं होगा।

इसके अलावा जब आपके पास अपने लक्ष्यों पर काम करने की ऊर्जा है और आप इसके लिए काम कर रहे हैं, तो आप स्वाभाविक रूप से प्रेरित और काम करने के लिए प्रेरित होंगे।

आप अभी कमजोर महसूस कर रहे हैं तो इसका कारण यह है कि आपका शरीर आपको संकेत दे रहा है कि आपके पास मौजूद सभी ऊर्जा का दुरुपयोग करने वाली चीजों का इस्तेमाल बंद कर दें और सही स्त्रोतो से ऊर्जा प्राप्त करें।

P.S: यदि आपके पास ऊर्जा संरक्षण से संबंधित कोई मूल्यवान सुझाव है तो टिप्पणियों में पोस्ट करें।

जानकारी उपयोगी लगी हो एवम पसन्द आई हो तो लाइक एवम शेयर जरूर करे।

चित्र स्त्रोत: गूगल इमेज।

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